माँ के हाथों ने ही मुझे थामा
माँ के हाथों ने ही मुझे थामा
माँ के हाथों ने ही मुझे थामा,
जब पहली बार चलना सीखा,
जितनी बार भी लड़खड़ाए कदम,
माँ ने ही संभाला मुझे हरपल, हरदम,
माँ तू साथ है तो मुझे छू नहीं सकता कोई ग़म,
तूने ही तो अपनी जिंदगी से मुझे दिया है जीवन,
मेरे दिल की हर बात तू समझ जाती है माँ,
तकलीफ़ में भी कैसे इतना तू मुस्कुराती है माँ,
मेरी खातिर कितनी रातें तूने काटी जाग कर,
मुझे हमेशा सुख में रखा अपना सुख चैन त्याग कर,
अपने सपने भूलाकर मेरे सपनों को किया साकार,
तुझ से ही तो मिला है माँ मेरे इस जीवन को आकार,
इतना निश्छल प्यार तेरे सिवा और कौन कर सकता माँ,
तेरी जगह इस दुनिया में कोई और कभी नहीं ले सकता माँ,
हालात चाहे कैसे भी हों तू अमीरी सा एहसास कराती,
ममता की दौलत से माँ तू ज़माने भर की खुशियाँ दे देती,
तेरा साथ,तेरा प्यार दुनिया की किसी दौलत से नहीं कम,
तेरी ममता की छांव तले कितना अमीर था मेरा वो बचपन,
तेरी ममता तेरे हर त्याग, बलिदान को मेरा नमन है माँ,
मेरे सर पर बना रहे तेरा साया जब तक यह जीवन है माँ।।
