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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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मां -जननी

मां -जननी

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मां के होने से घर जन्नत बनता है

मां की गोद में जीवन सुसंस्कृत बनता है


ईश्वर धरती पर मौजूद नहीं हो सकता

इसीलिए उसने मां को धरती पर भेजा


प्रेम स्नेह त्याग करूणा की सरिता है बहाती

कितने सुंदर संस्कारों बच्चों में भरती जाती 


कभी जीजा माता बनकर शिवाजी को गढ़ देती 

कभी यशोदा बनकर कान्हा पर प्यार लुटाती


मां ने ही साहस भरकर भगतसिंह जैसे वीर बनाए

मां तुम्हारी महानता को शब्दों में बंया किया न जाए।


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