माँ और ममता
माँ और ममता
माँ और ममता
इंसान हो या जानवर ,
ममता का एक ही रुप,
प्यार का न कोई पारावार ,
अविरल बहे चहुँ ओर अपार ।
शिशु चाहे किसी का भी हो,
माँ न होती उससे पलभर दूर,
अपनों के संग रहना चाहती ,
भरोसा भी उन्हीं पर करती ।
भगवान का दूजा रुप है माँ,
ममता की प्रतिमूरत है माँ,
साथ कभी न छूटे माँ का,
आशीर्वाद बन रहे सदा माँ।
