STORYMIRROR

Neerja Sharma

Classics Inspirational Thriller

4  

Neerja Sharma

Classics Inspirational Thriller

माँ और ममता

माँ और ममता

1 min
270

माँ और ममता 


इंसान हो या जानवर ,

ममता का एक ही रुप,

प्यार का न कोई पारावार ,

अविरल बहे चहुँ ओर अपार ।


शिशु चाहे किसी का भी हो, 

माँ न होती उससे पलभर दूर,

अपनों के संग रहना चाहती ,

भरोसा भी उन्हीं पर करती ।


भगवान का दूजा रुप है माँ,

ममता की प्रतिमूरत है माँ,

साथ कभी न छूटे माँ का, 

आशीर्वाद बन रहे सदा माँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics