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Rajeshwar Mandal

Tragedy

4  

Rajeshwar Mandal

Tragedy

लकीरें

लकीरें

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76


खींची गई

खींच दी गई

या खिंचवा दी गई

स्वयं या माध्यम नेपथ्य 

अटूट रिश्तों के बीच

एक अदृश्य लकीरें ऐसी

जो बांट गई मन को 

 

जो प्रगाढ़ होनी थी

उम्र और तजुर्बों के साथ

वह और कमजोर हो गई 

खटासें बद से बद्तर


कई दफे ऐसा हुआ

मामले कचहरी जाते जाते बचा

शायद समझदारी थी

कभी कभी सोचता हूं

काश! नासमझ ही होता

हदमद से रद्द भला

मीठी जहर की तरह

तन मन इस तरह न पीसता।



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