लकीर
लकीर
लोक व्यवहार /नेग -रिवाज,
समाज में यहां खुशियां लाते हैं।
कई बार,
बेसमझीं और आमदनी के कारण,
इंसान की हैसियत घटाते हैं।
लोक व्यवहार/ नेग -रिवाज
समाज के सभी वर्गों में
एक चलन बढ़ाते हैं।
जिनके पास आमदनी नहीं होती
वह कर्ज लेकर इसे निभाते हैं।
लोक व्यवहार /नेग -रिवाज,
समाज में यहां खुशियां लाते है।
कुछ लोग दिखावे में,
इस कदर अंधे हो जाते है।
बेटी को देने के लिए,
खरीदी हुई खुशियों से,
बेटी के जीवन का,
सौदा कर आते हैं।
लोक व्यवहार/ नेग रिवाज
समाज में यहां खुशियां लाते हैं।
कुछ लोग लालच से,
इतने भर जाते हैं।
लोक व्यवहार/ नेग रिवाजों को
अपने लालच के लिए,
समाज में,
दोहरी मानसिकता की,
लकीर खींच जाते हैं।
