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Anjana Singh (Anju)

Abstract

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Anjana Singh (Anju)

Abstract

" लहरें "

" लहरें "

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ये लहरें आती जाती है

अपनी जुबां से कुछ कह जाती है 

शायद इशारों में कुछ बताती है

या फिर बिना कुछ कहे 

वापस लौट जाती है


लहरों की तरह ही तो है जिंदगी

जो कहां पकड़ में आती है

कभी दौड़ कर यूं आती है

पुनः क्षण भर में लौट जाती है


लहरों सी है यह दुनिया जिसें 

हम समझ तो लेते हैं

गर पकड़ना चाहे इसे

तो कभी पकड़ नहीं पाते हैं


एक बार आकर लहरें जब

वापस फिर लौटती है

वैसे ही जिंदगी भी

अपना रुख बदलती है


इंसानों की दुनिया भी तो 

इन लहरों सी होती है

जीवन की हर उम्मीदें 

हर बार ऐसे डोलती है

कभी जिंदगी मुश्किल लगती है

 कभी नई कहानी गढ़ती है


इन लहरों की तरह ही तो जिंदगी

 कभी इंसान को पीछे धकेल देती है

और कभी आगे ले जाती 

जीवन में आगें बढ़ने की 

पुनः वह‌ ताकत देती है


मनुष्य के जीवन में 

लहरों की तरह

प्यार आता और चला जाता है

यूं ही कदमों के अपनें

निशान छोड़ जाता है


 इन लहरों को कोई

 समझें या ना समझें

जो पुनः निर्माण सिखाती है

एक तस्वीर खूबसूरत दिखाती है।


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