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Rajdip dineshbhai

Romance Others

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Rajdip dineshbhai

Romance Others

लड़की की मोहब्बत

लड़की की मोहब्बत

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मैं तुम्हारे खयाल में थी 

पत्ती जाने सुबह की हवाओं की लहर में थी 


ऐसे वैसे जैसे दिन गुजारे जा रहे है 

रात छोटी करने को मैं एक नींद में थी


याद वो पाठशाला की 

मैं पहली बेंच पर बैठी थी

बैठे थे तुम मेरे लाइन वाली बेंच पर 

मैं देखकर मुस्कराई थी 


गुज़र गए दिन वो 

कहने को एक वो बात रह गई 

वो भी क्या लम्हे थे 

जिसमें हमारी दोनों की रूह रह गई 


घर में लगने को लगता नहीं मन 

जाने कोई मेरी आदत मर गई 

नहीं था मन फिर भी खाने को बिठाया 

इतने वक़्त में ही एक मक्खी दाल में आकर मर गई 


देखकर लगता नहीं था तुम को 

तुम सबसे वाकई जुदा निकले 

मैं भी बदल गई 

सारे दिन-ओ-खयाल निकले 

पर हाँ तुम न निकले 


घर में लगने को लगाया मन भी अब 

कोई जाने बुरी बच्ची निकले

अब कोई ख्वाहिश भी नहीं 

बस जैसे तैसे आज का दिन निकले


हम चले गए दूर उन लम्हों से 

जिनसे मैं निकली तुम निकले 

पर हम न निकले 

आवाजें कान तक आने की खत्म न हुई 

नींद में ही नींद में कभी-कभी तुम निकले 


ख्वाब-ओ-खयाल खत्म हुआ 

दिन गुजारने को जिस्म भी तैयार हुआ 

यानी तुम थे !

फिर तो चाय के उबाल के साथ दिन खराब हुआ 


मैं कुछ नहीं थी मैं कुछ नहीं हूं 

मधुमक्खी डंक मार कर मर गई 

बताओ तुम्हारा क्या हुआ?


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