Rajdip dineshbhai
Classics Inspirational
ये रोज-ओ-शब तो गुजर जाने वाले होते है क्या तुम भी गुजर जाने वाले होते हो क्या?मैं तो गुज़ार कर देख रहा हूँ की गुजार ने वाले हादसे गुजर ने के होते है क्या!
महबूब
नजरिया
ख्वाब
घर में रोशनी ...
गुज़र-गुजार
मन के वहम में...
औरत तो औरत थी
खिड़की
मत चाहो
मैं था
इस बात पर हँसी आई के इसको भी ज़िन्दगी ने छू लिया होगा। इस बात पर हँसी आई के इसको भी ज़िन्दगी ने छू लिया होगा।
निश्चय ही सब पाप मर जाएंगे। यह महात्माओं का अनुभूति सरल प्रयोग है। निश्चय ही सब पाप मर जाएंगे। यह महात्माओं का अनुभूति सरल प्रयोग है।
जगदीशपुर रियासत का शासक, अंग्रेजी हुकूमत को दिखाया दम खम। जगदीशपुर रियासत का शासक, अंग्रेजी हुकूमत को दिखाया दम खम।
जामवंत ने याद दिलाया हनुमत सब बल बुद्धि समाया सौ योजन सिंधु कर पारा रामभक्त है बजरंग। जामवंत ने याद दिलाया हनुमत सब बल बुद्धि समाया सौ योजन सिंधु कर पारा रामभक्त है ...
कृष्ण सुदामा सी दोस्ती सारे जग से न्यारी है, भाव प्रेम में अनूठी वह सबको लगे प्यारी है कृष्ण सुदामा सी दोस्ती सारे जग से न्यारी है, भाव प्रेम में अनूठी वह सबको लगे ...
एक तलवार उठी कई सर कलम कर गई। एक तलवार उठी कई सर कलम कर गई।
उन्हीं कृष्ण का जन्मोत्सव है जो रस का अतिशय उफान हैं। उन्हीं कृष्ण का जन्मोत्सव है जो रस का अतिशय उफान हैं।
भटकते हुए राम लक्ष्मन,पर्वत ऋषिमुख में आए। भटकते हुए राम लक्ष्मन,पर्वत ऋषिमुख में आए।
जिसने किया अपना सर्वोच्च बलिदान ऐसे वीरों की माँ कहलाती है जिसने किया अपना सर्वोच्च बलिदान ऐसे वीरों की माँ कहलाती है
बुरा बना कर रावण को सारे, सभी रावण हर साल जलाते हैं। बुरा बना कर रावण को सारे, सभी रावण हर साल जलाते हैं।
हे कृष्ण! उठाओ सुदर्शन, हे शिव! केश खोलो। हे कृष्ण! उठाओ सुदर्शन, हे शिव! केश खोलो।
आदि शक्ति मॉं भगवती दुर्गा भवानी का शारदीय नवरात्रि में पंचम स्वरूप स्कन्द माता। आदि शक्ति मॉं भगवती दुर्गा भवानी का शारदीय नवरात्रि में पंचम स्वरूप स्कन्द मा...
मासूम घटाओं संग धरती ने दी है ममता सारी। मासूम घटाओं संग धरती ने दी है ममता सारी।
देवभूमि के देवदूत हिमालय को तुम क्यों बिसराओगे देवभूमि के देवदूत हिमालय को तुम क्यों बिसराओगे
भक्ति करुणा आभार समर्पण, ममता से ये अंबुज खिल जाये। भक्ति करुणा आभार समर्पण, ममता से ये अंबुज खिल जाये।
ध्वनि के पर्वत से निर्झर-निर्झर लहरों में झर शब्दों के शीकर। ध्वनि के पर्वत से निर्झर-निर्झर लहरों में झर शब्दों के शीकर।
एक कंकर मुझे मरने दो तुम्हारे मन की शांत झील में। एक कंकर मुझे मरने दो तुम्हारे मन की शांत झील में।
मैं पंछी खुले आसमनो का मैं खुले आसमनो मैं उड़ता जाऊँ। मैं पंछी खुले आसमनो का मैं खुले आसमनो मैं उड़ता जाऊँ।
चाँद-सितारों से हुई, चुपके-चुपके बात। चंदन-चंदन हो गई, यादों वाली रात।। चाँद-सितारों से हुई, चुपके-चुपके बात। चंदन-चंदन हो गई, यादों वाली रात।।
इन धर्मों के, अलग अलग त्यौहार, लोग मनाते बढ़े चाव से, आपस में रल मिल कर। इन धर्मों के, अलग अलग त्यौहार, लोग मनाते बढ़े चाव से, आपस में रल मिल कर...