ख्वाब
ख्वाब
जिन्दा लोगों के
मरे हुए लोगों के
ख्वाब
मिली हुई मंजिल के ख्वाब
न मिली हुई मंजिल के ख्वाब
जूठे ख्वाब
सच्चे ख्वाब
मैं खुदको दिखाता हूं ख्वाब
फिर जो न हो पाया वो करता हूं
जो ख्वाब मुकम्मल न हुए
वो ख्वाब को रोज रटता हूं
और फिर ख्वाब की गठरी को
लाद सो जाता हूँ और जंहा है
ख्वाब ही ख्वाब
मिलने के ख्वाब
बिछड़ने के ख्वाब
प्यार के ख्वाब
परियों के ख्वाब
कुछ सुबह में सब से जिक्र करने के ख्वाब
कुछ न बताने के ख्वाब
उठकर भी देखता हूं ख्वाब
माँ की याद के ख्वाब
पिताजी का बोझ कम करने का ख्वाब
ख्वाब ही ख्वाब है
और उन ख्वाबों में किसीको ढूंढना
कितना मुश्किल है ?
