नजरिया
नजरिया
किस और से देखू खुद को
गये गुजरे वक़्त में
या
आने वाले वक़्त में देखू
खुद को
तन्हाई में देखू
या
सभी के साथ देखू खुदको
हर एक के साथ अलग अलग
हूं
बहन के साथ अलग
किसी कोई ल़डकि के साथ अलग
दोनों है लड़किया
फिर भी जाने कौनसा
खयाल मुझे ये भेदभाव कराता है
मैं सत्य जानता हूं इसीलिए
शायद वर्ना मेरी बहन बहन न होती
तो दूसरी ल़डकियों के तरह
मैं उसे भी देखता |
मेरी माँ माँ न होती तो
वो भी मुझे बुरी लगने लगती
ये जो है देखने का नजरिया
बड़ा गम्भीर है
