लाशें
लाशें
तुम्हारा शहर मेरे गाँव से
आज भी बेहतर नहीं
और कल भी नहीं था
और आनेवाले कल में
भी नहीं होगा
शहर एक ज़हर है
जिसका ईलाज गांव के पास है
इस ज़हर ने सबकुछ तबाह
और बर्बाद कर दिया है
जाति-सम्प्रदाय भाषा और
मज़हब के नाम पर इसने
इंसानियत का क़त्ल किया है
लाखों दिलों को जो मासूम थे
इसने बहका कर उन्हें
पथभ्रस्ट किया है
इसके वज़ूद की बुनियाद
वो ईद और दीवाली है
जिसका पास कभी मुहब्बत
हुआ करती थी आज चन्द
काग़ज़ी टुकड़ों ने उस
मुहब्बत को हिन्दू और
मुसलमान कर दिया
दुनियां गवाह है जहां
ज़ज़्बात कुचले जाते हैं
वहां आत्मा मर जाती है
और जहां आत्मा मर जाती है
वहां लाश ही रह जाती है
और जहां लाशें दफनाई जाती हैं
उस जगह को श्मशान
(क़ब्रिस्तान) कहते हैं....
