STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

4  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

क्योंकि तू बेवफा है

क्योंकि तू बेवफा है

1 min
408

न तू मेरी शायरी है,

न तू मेरा प्यार है,

न तू मेरी हसरत है,

न तू मेरी आरजू है,


न तू मेरी जिंदगी है,

क्योंकि तू बेवफा है,

तूने मुझको ठगा है,

तू फितनागर है,

तू प्यार की सौदागर है,


तू बेखौफ प्यार की कातिल है,

तू एक जहरीली नागिन है,

तू बेशरम बेहया है,

तू बड़ी बेवफा है,


तू ने प्यार के नाम पर,

मुझे खूब बर्बाद किया है,

मेरे रिश्ते नातों को छला है,

मेरे दिल का खून किया है,


ना तू अर्धाग्नी है फेरों की,

न तू संगनी है राहों की,

ना तू बेटी है किसी अपनों की,

न तू बहिन है राखी बंधनों की,


न तू प्यार है साथी जन्मों की,

न तू दोस्त है मझदारों की,

न तू रिश्तों की डोर है,

न तू संध्या उजालों का भोर है,


तू बेवफा बेदर्द है,

तेरी आंखों में नहीं शील है,

तू बदजात बेवफा बेदर्द है।


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Similar hindi poem from Tragedy