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Jyoti Naresh Bhavnani

Tragedy Inspirational

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Jyoti Naresh Bhavnani

Tragedy Inspirational

क्यों नहीं समझते हो?

क्यों नहीं समझते हो?

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जानते हो अंजाम फिर भी,

क्यों अनजान बने फिरते हो?

क्यों असावधानियां बरत के,

जोखिमों से तुम लड़ते हो?


क्यों सुरक्षा के नियमों को भुलाकर,

अपनी ज़िंदगी से तुम खेलते हो?

क्यों बच्चों जैसी नादानियां कर के,

अपने परिवार को रोने के लिए छोड़ते हो?


देश की हो तुम एक अनमोल धरोहर,

क्यों ये बात तुम नहीं समझते हो?

देश के लिए करना है तुमको बहुत कुछ,

इस बात को क्यों तुम हरदम भूलते हो।


क्यों सरकार के शून्य क्षति लक्ष्य को,

तुम अपना लक्ष्य नहीं समझते हो?

क्यों इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए,

तुम अपना योगदान नहीं देते हो?


क्यों घर, मार्ग और कार्यस्थल पर,

छोटी छोटी गलतियां तुम करते हो?

जिसके बदले में कई बार तो तुम,

बड़ी बड़ी कीमतें भी चुकाते हो?


क्यों गीले हाथों से बिजली के यंत्रों को छूकर,

खतरे को आमंत्रित तुम करते हो?

क्यों गैस के आगे मोबाइल फोन पर,

बेकार की बातें इतनी तुम करते हो?


क्यों रात को सोने से पहले हर रोज़ ही,

गैस सिलेंडर को बंद नहीं तुम करते हो?

क्यों मोबाइल फोन को खुद से और,

बच्चों से दूर नहीं तुम रखते हो?


क्यों मार्ग पर बड़ी तेज़ रफ्तार से,

बिना हेलमेट के गाड़ी तुम चलाते हो?

क्यों शराब पीकर और नशे की चीज़ें खाकर,

गाड़ी की जैसे कोई रेस तुम लगाते हो?


क्यों सीट बेल्ट बांधते नहीं हो हमेशा,

क्यों ओवरटेक हमेशा तुम करते हो?

क्यों गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन पर,

बात किसी से तुम कभी भी करते हो?


क्यों कार्यस्थल पर सेफ्टी शू, जैकेट और ग्लोव्ज़ का,

इस्तेमाल ज़रूरी नहीं तुम समझते हो?

क्यों रात की पाली में काम करने के बाद,

किसी ट्रक के नीचे आराम तुम करते हो?


क्यों जहाज़ पर काम करते वक्त,

ध्यान से रस्सों को नहीं पकड़ते हो?

क्यों माल समान के उतार चढ़ाव के वक्त,

क्रेनों के नीचे खड़े तुम रहते हो?


सुरक्षा नियमों का पालन है शून्य क्षति का द्वार,

क्यों इस सच्चाई को तुम भूलते हो?

कामयाबी, प्रगति और सुख समृद्धि है जिसके पार,

क्यों उस तक पहुंचने के लिए सचेत नहीं तुम होते हो?



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