क्यों किया मैंने नशा ?
क्यों किया मैंने नशा ?
न मिलने पर उसके,
बैचेन हो जाता हूं मैं।
मिलने पर उसके,
सब गम भूल जाता हूं मैं।
मुझे मालूम है कि,
चंद घंटों की चैन की खातिर
मैं बन बैठा हूं अपना कातिल
अपनों ने मुझसे नाता तोड़ लिया है
लगता है बेसहारा छोड़ दिया है।
मैंने सोचा था कि मिलेगी,
मुझे अपनी मंजिल।
मगर राहों में
मिले कुछ दोस्त संगदिल।
मैंने उन्हें जब अपना गम सुनाया
तो उन्होंने मुझे एक पैकेट थमाया।
पर मुझे नहीं था पता
कि इसमें क्या है बला।
जब मैंने उसे खाया
तो संवय को एक
अनोखे लोक में पाया।
पहले अनुभव में बहुत,
अच्छा लगा मुझे।
दोस्तों ने कहा रोज देंगे तुझे
ऐसे यह सिलसिला शुरू हुआ।
और उड़ने लगा मेरे पैसों का धुआं।
मैंने कितनी बार चाहा
कि मैं अपने आप को,
इस भंवर से निकालूं।
जितना निकलने की,
कोशिश करता हूं मैं।
उतना ही गहराई में ,
डूबता ही जा रहा हूं मैं।
अपने एक छोटी सी भूल,
पर पछता रहा हूं मैं।
सोचता हूं कि क्यों ?
हमदर्द बने दोस्तों में फंसा
और क्यों किया मैंने नशा ?
