STORYMIRROR

Geeta Upadhyay

Inspirational

4  

Geeta Upadhyay

Inspirational

बुझते हैं चिराग

बुझते हैं चिराग

1 min
12

 बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है

 क्यों मां तेरी आंखें रह रह के भर आती है

और तू कभी भूले से भी नहीं मुस्कुराती है

 बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है


 एक अजीब सी घबराहट दिल पर नश्तर चलाती है 

कभी तो लगता है कि सांस रुक जाती है  

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है 

गमों के भवंर में डूबते हैं जब कभी तो


 खुशियां तूफान बन के आती है

 बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है

 है भरोसा मुझे उस खुदा पर

 फिर भी क्यों यह संभावनाओं की दीवार खड़ी हो जाती है


 बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है

 बात नहीं इतने इसमें कोई बहलाने की 

नाकामयाबी की अंतिम सीढ़ी पर ही कामयाबी टकराती है 

बुझते हैं चिराग रोशनी थोड़े ही जाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational