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Dayasagar Dharua

Abstract

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Dayasagar Dharua

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क्या शब्द हैं

क्या शब्द हैं

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जैसे कई शब्द

आपस जुड़ कर

भावनाओं को अर्थ देते हैं

फिर उन सार्थक भावनाओं को

कोरे पन्नों मे उतारा जाता है

जब वे एक लय मे आ जाते हैं

तभी कविता कहलाते हैं

उसी तरह मेरी जिंदगी मे

आप वो शब्द हो

और मैं आपकी एक भावना

जिसे आपने

इस दुनिया की कागज़ मे

एक मधुर लय मे

इस कदर बांधा है कि

मैं सभी को भाता हूँ

दिलों को छूता हूँ

वो पल जब आप मुझे

बारीकी से तराशते थे

खामीयों को खोदते थे

खूबीयाँ परोसते थे

अब शायद

उन्ही खूबीयों के साथ मैं

किसी कविता के ढाँचे मे आ जाऊँ

थोड़ा और सार्थक हो जाऊँ

थोड़े और लोगों को पसंद आ जाऊँ

पर मेरी चाह हमेशा यही रहेगी

के आप-शब्दों को

आपकी भावनाओं को

मैं और निखारता रहूँ

ताकी जब भी कोई

मेरी जिंदगी की किताब खोले

मुझ-कविता की आख्यान करे

कविता मे छिपी शब्दों को जान सके

मुझमे समाये आप को पहचान सके

हर वो पाठक

इस कविता को पढ़ते ही कहे

"क्या शब्द हैं" बस।


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