STORYMIRROR

Dayasagar Dharua

Others

3  

Dayasagar Dharua

Others

पतझड़

पतझड़

1 min
298

पतझड़ के दिन

जंगलें कहानीयाँ सुनाती हैं


कहानी बिछड़े प्रेमियों की

एक दुसरे से दुर दो कपोतों की

जो पिछले साल से

मिलने हमजोली से

प्रतीक्षारत हैं

वसंत के लौटने के दिन की


वो कहानियाँ देखो घट रहे हैं


पतझड़ के दिन

झरने कवितायें दोहराते हैं


कवितायें भँवरों की

उनकी प्रेमिकाओं, फूल-कुसुमों की

जो वसंत की आड़ में

प्रेम आलाप की ताक में

प्रतीक्षारत हैं

नई कलियों के खिलने की


वो कवितायें बोले जा रहे हैं


पतझड़ के दिन

वसंत के साथ देखो लौट आये हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन