।। क्या फायदा ।।
।। क्या फायदा ।।
तेरी महफिल में आने से क्या फायदा,
गीत अपने सुनाने से क्या फायदा,
जब किसी और की तुझ को परवाह नहीं,
तेरी नजरों में छाने से क्या फायदा।
आज की रात काली बहुत है मगर,
सूझती ही नहीं है किसी को डगर,
जब मुसाफिर को मंजिल ही खाने लगे,
और दीपक जलाने से क्या फायदा।।
कब से बैठा है वो मुझ से मुँह मोड़ कर,
बेफ़िकर बेखयाली में सब तोड़ कर ,
जब तलक गाँठ ये दिल से जाती नहीं,
तन की दूरी मिटाने से क्या फायदा ।।
तेरे होने न होने से होता है क्या ,
गिर भी जाये जो ग़र कोई रोता है क्या,
ये जमाना तो बस खुद में मसरूफ है,
इसके झूठे दिखावों से क्या फायदा।।
है जवानी शिला को जो कंकर करे,
मोड़ दरिया का रुख शिव सी मस्तक धरे,
देश के काम ही जो न आये कभी,
ऐसी उमड़ी जवानी का क्या फायदा।।
काम ऐसे करो याद में तुम रहो
बाद जाने के फरियाद मैं तुम रहो,
दो बूंद आँसू और मिट्टी में मिल जाये जो,
ऐसी फिर जिंदगानी का क्या फायदा ।।
लब से अब बस निकलती मेरी बात हो,
मेरे चेहरे पे बस मेरे ज़ज्बात हों,
छीन ले मुझसे मेरा जो अदब ईमान सब,
ऐसी मेहरबानी जताने का क्या फायदा।।
