क्या खूब दिखती हो
क्या खूब दिखती हो
ओ हो...ओ हो..मेरी पंखुड़ी,
आज क्या बात है होंठों की मुस्कान का राज,
क्या कोई बिशेष बात है,
या तुम्हारे लिए कोई खास दिन,
उफ़...तुम नहीं जानते आज क्या है,
आज मोहब्बत का दिन है,
पर तुम क्या जानो आज क्या है,
तुम और तुम्हारी शायरी बस यही समझो तुम,
इश्क मोहब्बत तुम्हें रास कहां आते,
ओ...हो समझा....पर तुम क्यों इतना भड़कती हो,
ला दूंगा तुम्हारे लिए भी सोने के झुमके,
ओ....सोना चांदी हीरा मोती तिजोरी में रखते हैं,
फूल गुलाब का वो गहना है जो बालों में सजाते हैं,
पर तुम्हें कहां पता होगा तुम तो अलग दुनिया में रहते हो,
अरे....ठीक है मेरी गुलाबो,
ला दूंगा तेरे लिए गुलाब मैं,
ओ....फोर कहने से ला दोगे तो क्या फायदा,
मजा जब है जब आप अपनी मर्जी से लाते,
मेरे बालों में लगाते...
चलो छोड़ो ...ये सब तुम्हारे वश की बात नहीं,
तुम कहां करते मुझसे प्रेम हो,
ओ हो...तुम तो रूठती हो,
अरे यहां देखो तो जरा,
प्यार इतना करते हैं तुमसे सनम,
जान मांगोगी जान दे देंगे हम,
पर यूं न रूठा करो,
जान जाती है हमारी,
थोड़ा रूको और आंखों को खोलो,
क्या खूब दिखती हो लगा बालों में गुलाब को तुम,
याद कैसे न रहता ये दिन,
जहां पहला गुलाब दिया था मैंने तुम्हें,
और तुमने यूं पलकें झुका थोड़ा मुस्कुराई थी,
वो पल आज भी याद है मुझे,
और तुम कहती हम नहीं समझते,
अरे...जाओ तुम क्या जानो हमें।

