कविता सफ़लता
कविता सफ़लता
दिल में उम्मीद की लौ जलाये रखना
चींटियों की तरह बार बार प्रयास कर
धैर्य अपना बनाए रखना
अर्जुन सा लक्ष्य साध होगी जीत तेरी
एक दिन मन में ये भाव बनाए रखना
मेहनत कर पेड़ो को पानी दे
खिलेगा बंजर भूमि में भी फूल
ये आस्था बनाए रखना
चिड़ियों के बच्चों को उड़ान भरने में समय लगता है
घर बनाने, घर सजाने, महल बनाने में
समय लगता है
पत्थर से मूर्ति बनाने में समय लगता है
सीप से मोती निकालने में समय लगता है
निराशा को त्याग कर आशा का भाव बनाए रखना
राह में ठोकर खाकर नहीं घबराए
थोड़ा चिंतन कर कारण का पता लगाए
भव्य शिखरों का कीर्तिमान तू बनाता जाए
कांटों से ना डर प्रसून की चाह हमेशा बनाये रखना
बुलंद हौसले से मंज़िल पाने की ललक जगाए रखना
संघर्ष के उस पार सुन्दर सा जहान है
ये उम्मीद बनाए रखना
मेहनत की तपिश एक दिन अपना रंग दिखायी देगी
पतझड़ का अवसान कर बसंत बहार आएगी
बस इस सोच से कर हर पार हर कठिनाई
सफलता मिलेगी तुझे ये ज़ज्बा बनाए रखना
सकारात्मक सोच को अपना परम मित्र बना
संकल्प ले धैर्य अपना बनाए रखना
विफलताओं से ना डर
अपना सपना साकार करने की उम्मीद बनाए रखना।
