STORYMIRROR

Poonam Gupta

Tragedy

4  

Poonam Gupta

Tragedy

कविता -बेरोजगारी की मार

कविता -बेरोजगारी की मार

1 min
411

आज के युवा झेल रहे बेरोजगारी की मार है

पढ़ लिख कर भी नहीं मिल रही नौकरी ये कैसा दुर्भाग्य है


जिसको देखो वो बेरोजगारी की मार से त्रस्त है

एक सरकारी नौकरी की इच्छा उसके जीवन का सपना है


जीवन जीने के लिये सभी मेनहत करते हैं

हम तो उनसे पढ़े लिखे फिर क्यों मेनहत नहीं करते हैं


कोई काम छोटा और बड़ा नहीं होता है

अपने मेनहत और लगन से जीवन सफल होता है


किसी का तुम इंतजार न करो अपने बलबूत पर काम करो

भूख और गरीबी को मिटाकर अपना भरण पोषण करो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy