कवि-कर्तव्य
कवि-कर्तव्य
अगर किसी की आंखों में नमी है,
तो जरूरी नहीं कि कुछ कमी है,
हवा सैर पर निकली होगी,
तिनकों को प्यास रही होगी।
अंदाजा लगाना आसान नहीं
कि क्या कुछ बात रही होगी?
दिल दुख गया जिस बात से,
किसने वो बात कही होगी?
होंठों पर मुस्कान है अगर,
जरूरी नहीं कि दिल खुश हो,
हो सकता है दर्द छुपाने का
ये कोई नायाब हुनर हो।
कशमकश में तुम क्यों हो?
छोड़ो ये सब आगे बढ़ो,
ये बस कवि की कल्पना है,
तुम इसमें इतना मत डूबो।
चाहत, नफरत, मिलन और जुदाई,
इन सबसे ही तो मैंने अपनी कविता सजाई।
कुछ नूतन विषय, कई शब्दों का संचय,
न कोई अनुनय, न ही विनय,
समाज का आईना बन जाऊं जरा,
लोगों को आईना दिखाऊं जरा,
लाभ नहीं कुछ, हानि नहीं है,
थोड़ा सुधार लाऊं यही प्रयास मेरा।
