कुंडलिया : "जाति"
कुंडलिया : "जाति"
जाति लाती समाज में, ऊँच नीच का भाव।
बढाने छुवाछूत को, चले दांव पर दांव।
चले दांव पर दांव, ये भेदभाव बढ़ाये।
घृणा की ये आग, जात मन में भड़काये।
कहे 'भारती' जात, पाठ भेद का पढ़ाती।
नफरत का षडयंत्र, समाज में जाति लाती।
