STORYMIRROR

Rashmi Lata Mishra

Drama

3  

Rashmi Lata Mishra

Drama

कुंभ मेला

कुंभ मेला

1 min
311

संक्रांति पर विशेष स्नान

कुंभ है महान,कुंभ है महान

अमृत की बूंदों से उपजा श्रेठ

अमर है यह।


वरदान अध्यात्म यह कहता है

विश्वास है अपना-अपना

पर मात्र डुबकी लगा लेने से  

गंगा जी मे कर्मों

की गति न उलट जाएगी।


वही तो एक सम्पदा है

जैसी करनी, वैसी भरनी

वही तो तेरे साथ जायेगी

तो पावन सलिला।


गंगा कोन मैला कर रे प्राणी

पावन कुंभ की आस्था

पर न फेर तू पापों का पानी

सदवृति, सदभावो,सद्कर्मो

की है ये बेला।


यही संकल्प कर ले तू

फिर आना कुंभ मेला

फिर आना कुंभ मेला।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama