STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Romance

3.5  

Mukesh Bissa

Romance

कुछ तो बात हैं

कुछ तो बात हैं

1 min
328

कुछ तो बात है

बदलती हैं फिजां क्यों

कुछ तो बात है


चाँद नहीं दिखता क्यों

कुछ तो बात है

बस्ती में बदले आदमी क्यों

कुछ तो बात है


शीशा खुद को देख हैरान क्यो

कुछ तो बात है

लबों पे कड़वी बात क्यों

कुछ तो बात है


मुस्कान उन से रूठी क्यों

कुछ तो बात है

इस शहर में हर शख्स परेशान क्यों

कुछ तो बात हैं


जल रहा एक नन्हा दिया क्यों

कुछ तो बात है

हर बार मेरा इम्तिहान क्यों

कुछ तो बात है


दोस्त भी दुश्मन क्यों

कुछ तो बात है

दिल इतना नादान क्यों

कुछ तो बात है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance