STORYMIRROR

Saurabh Chauhan

Abstract

3  

Saurabh Chauhan

Abstract

कुछ पलों का सफर

कुछ पलों का सफर

1 min
269

मन को शांत कर दे 

कुछ ऐसी बात कर 

मैं तुझसे प्यार करूँ 

कुछ ऐसी बात कर 


मैं तेरे साथ चल दूँ 

मुझे घर का रास्ता दिखा 

मुझे शैतान हैं दिखते हर जगह 

मुझे भगवान का रूप दिखा 


ये परदा हटा दो ज़रा 

तो रौशनी आ जाये 

खिल खिलाकर हँस दो ज़रा 

तो बहारों में खुशबू आ जाये 


कुछ पल ही बैठ जाओ साथ में 

ये यादें ही काफ़ी होंगी 

इस कुछ पलों के सफर में 

खुशियाँ ग़मों से भारी होंगी 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract