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कुछ हाइकु

कुछ हाइकु

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रजाई ओढ़े

सिकुड़ कर सोये-

पूस की रात


जरा अवस्था

सिकुड़ रहीं खालें-

कातर आँखें


वक्त की बात-

माथे पे सिलवटें

जिन्दगी थाह


खो रहे प्यार

सिकुड़ रहे रिश्ते-

पाश्चात्य रीति


लाचार व्यक्ति

छिपी हुई गरीबी-

सिलवटों में।


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