Manish Kumar Srivastava
Tragedy
रजाई ओढ़े
सिकुड़ कर सोये-
पूस की रात
जरा अवस्था
सिकुड़ रहीं खालें-
कातर आँखें
वक्त की बात-
माथे पे सिलवटें
जिन्दगी थाह
खो रहे प्यार
सिकुड़ रहे रिश्ते-
पाश्चात्य रीति
लाचार व्यक्ति
छिपी हुई गरीबी-
सिलवटों में।
वर्षा ऋतु में...
बच्चों का एम ...
प्रकृति पर हा...
मोहब्बत हमारी...
पढ़ते पूरी रात...
कुछ हाइकु
नव बसन्त
कोरोना कोरोना करते, करुणा को भूल गए! कोरोना कोरोना करते, करुणा को भूल गए!
इंसान को हमने अपनी इन आँखों से भगवान बनते देखा है, इंसान को हमने अपनी इन आँखों से भगवान बनते देखा है,
साथ छोड़ना चाहो तो कमिया बहुत है मुझमे पर साथ निभाना चाहो तो खूबियां भी कम नहीं। साथ छोड़ना चाहो तो कमिया बहुत है मुझमे पर साथ निभाना चाहो तो खूबियां भी कम नही...
और नफरतों से भरी दुनिया में प्रेम की फुहार का। और नफरतों से भरी दुनिया में प्रेम की फुहार का।
फिर से सुनहरी धूप खिलेगी, भविष्य फिर से मुस्कुराएगा। फिर से सुनहरी धूप खिलेगी, भविष्य फिर से मुस्कुराएगा।
मन में है विश्वास, छाएगी चारों ओर फिर खुशहाली। मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास।। मन में है विश्वास, छाएगी चारों ओर फिर खुशहाली। मन में है विश्वास, पूरा है व...
उसे लग रहा था कि शादी के दिन नही आज उस बेटी की सदा के लिए घर से विदाई हो गयी है। उसे लग रहा था कि शादी के दिन नही आज उस बेटी की सदा के लिए घर से विदाई हो गयी है।
जो घाव दिए है हमने धरती को उन घावों पर मरहम अब लगाना होगा। जो घाव दिए है हमने धरती को उन घावों पर मरहम अब लगाना होगा।
सुघड़ न कहलाओगी बोलो न ! हाँ में हाँ मिलाओगी। सुघड़ न कहलाओगी बोलो न ! हाँ में हाँ मिलाओगी।
चारों तरफ अजीब सा सन्नाटा छाया है सब पर ना जाने क्यों करोना का अज़ाब आया है। चारों तरफ अजीब सा सन्नाटा छाया है सब पर ना जाने क्यों करोना का अज़ाब आया है।
पकवान न सही पर पर वो अपनी भूख तो मिटा पाता। पकवान न सही पर पर वो अपनी भूख तो मिटा पाता।
जाने कौन बुरी खबर, अब आती है, मेरे शहर की वीरान गलियाँ, आजकल बहुत डराती हैं। जाने कौन बुरी खबर, अब आती है, मेरे शहर की वीरान गलियाँ, आजकल बहुत डरात...
पर क्या करूँ, अपनों का उदास चेहरा भूलता कहाँ मुझे। पर क्या करूँ, अपनों का उदास चेहरा भूलता कहाँ मुझे।
मानव को बनाकर शायद अब विधाता भी बहुत, बहुत पछताते हैं। मानव को बनाकर शायद अब विधाता भी बहुत, बहुत पछताते हैं।
हीरो ही नायक और वही खलनायक होता है खो सी गई है...... दोनों के बीच की वह महीन रेखा हीरो ही नायक और वही खलनायक होता है खो सी गई है...... दोनों के बीच की वह म...
ये भेद कैसे कर पाते हो कोई मुझे बताये की ये धर्म क्या है ? ये भेद कैसे कर पाते हो कोई मुझे बताये की ये धर्म क्या है ?
कब समझेंगे ये साज़िश को हम की हम खुद से कितने दूर हुए हैं। कब समझेंगे ये साज़िश को हम की हम खुद से कितने दूर हुए हैं।
सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर होने का भरम मैं पल भर मे चूर कर देता सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर होने का भरम मैं पल भर मे चूर कर देता
वहाँ जाकर सारे उत्पाती बच्चों के टिफ़िन खा लिए। वहाँ जाकर सारे उत्पाती बच्चों के टिफ़िन खा लिए।
दुनिया बैठी तबाही के ढेर पर, मर रहा इंसान। दुनिया बैठी तबाही के ढेर पर, मर रहा इंसान।