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manish shukla

Drama

3  

manish shukla

Drama

कठपुतलियाँ

कठपुतलियाँ

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इशारों से चलती हैं,

हिलती- डुलती हैं,


अपने जीवन की डोर,

दूसरे को देकर थिरकती हैं,

ये कठपुतलियाँ हैं,


अपनी साँसों के लिए मचलती हैं

इनको नहीं है आजादी से वास्ता,

नहीं मांगती हैं अपना रास्ता,


गुलामी की जंजीरों में ही,

खिलती हैं,

ये कठपुतलियाँ हैं,

अपने जीवन की डोर,

दूसरे को देकर थिरकती हैं।


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