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Manoj Kumar

Romance Thriller

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Manoj Kumar

Romance Thriller

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

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अगर तू न चाहे मुझे

तो तू क्या और वो क्या

हर तरफ़ किस्सा है, अपनी नज़रों का

तू मत भुलाऊँ किधर जाऊँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

तू न आईं तो मैं किधर जाऊँगा


तेरी अदाओं पे मरता हूँ

कहने से कुछ डरता हूँ

दिल के पन्ने पे नाम लिक्खों

तू चाहे तो मैं मिटा दूँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

तू न आईं तो मैं किधर जाऊँगा


मेरी ज़िन्दगी में तेरी सूरत ही

अकसर ही वो दफ़न होते हैं

पराई कोई मंज़िल नहीं हैं मेरी

बस तू ही है कैसे भुलाऊँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

तू न आईं तो मैं किधर जाऊँगा


तुझसे मिलने के बाद अब तो

मेरी तो सफ़र वाली शाम हुईं

तू मिली हो तो लगता है सुकून

लगता है दिल में तेरे हो जाऊँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

तू न आईं तो मैं किधर जाऊँगा


अपनी खिड़कियों से तू मुझे देख

मेरे हवाओं में "पर" उड़ते देख

तेरी याद में आज भी आवारा हूँ

तू न मिली तो मैं मर ही जाऊँगा

कतरा हूँ बिखर जाऊँगा

तू न आईं तो मैं किधर जाऊँगा।।


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