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Kajal Kumari

Romance

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Kajal Kumari

Romance

कृष्ण कृष्ण पुकारे मेरा तन मन

कृष्ण कृष्ण पुकारे मेरा तन मन

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कृष्ण कृष्ण पुकारे मेरा तन मन और मेरी आत्मा, 

कृष्ण ही है मेरे सबकुछ वही मेरे परमात्मा, 

हर पल इंतजार करू की एक नजर तो निहार लू, 

उस सवारियां को देखकर मैं खुद को भी सवार लूं, 


सुनने को मेरे कान बैचेन है उस मुरलीधर की मुरली की धुन,

 कृष्ण को लिया है मैने अपना जीवन साथी चुन, 

कृष्ण मेरी परछाईं में बसे है, है वो मुझमें आधा, 

प्रेम पूजारण बन गई मैं तो बन गई कृष्ण की राधा, 


है मेरा ये श्रृंगार उस छलिए के लिए उसके लिए हूं मैं सजकर तैयार, 

आज लुटाऊँगी अपने कान्हा पर मैं अपना सारा प्यार , 

श्याम ने वृंदावन की गलियों में बंशी से सब सुर साधा है ,

 राधा पुकारे कृष्ण कृष्ण ढूंढे गोकुल में लेकिन कृष्ण में ही राधा है।


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