कृष्ण का मधुबन।
कृष्ण का मधुबन।
कृष्ण का वो मधुबन है प्यारा,
जिसमें लगा जीवन वृक्ष हमारा,
मनमोहन का वो मधुबन प्यारा,
जिसमें हैं फूलों का नजारा,
जीवन में फूल खिले हैं,
जब मोहन से, हम जा मिले हैं
प्रेम के फल की प्रतीक्षा हैं,
फल को पाने की चल रही परीक्षा है,
जिसे मोहन प्रेम फल मिला हैं,
वही जीवन सुंदर बनकर खिला हैं,
कृष्ण का मन मधुबन, उपवन
उसमें खिलते हैं प्रेम सुमन,
जीवन मोहन मधुसूदन वन,
बन गया हैं सांवरिया मन,
कोई नहीं हैं सहारा मोहन,
तारोगे तुम, तुम्हीं भगवन.......
