कृपा
कृपा
बड़ी कृपा कीन्ही नाथ आपने,जो याद तुम्हारी आ जाती है।
पल भर में तुम ओझल हो जाते,दिल की धड़कन तब बढ़ जाती है।।
पता नहीं वह पल कब होगा, दुर्लभ दर्शन हो तुम्हारा,
न जाने कब किस रूप में, कर सकूंगा नमन तुम्हारा,
देख तुम्हारी अद्भुत लीला, बुद्धि विवेक हर जाती है।।
बड़ी कृपा कीन्ही.......
दीन सुदामा की हालत देखो, कैसे तुमने पार लगाया,
अहंकारी गजराज को तुमने, बड़े शीघ्र ग्राह से बचाया,
मैं तो ठहरा अधम-पातकी,आंख शर्म से झुक जाती है।।
बड़ी कृपा कीन्ही.......
हे ! सृष्टि के पालन कर्ता, संकट मोचन दुःख के हर्ता,
कैसे करूं मैं सेवा तुम्हारी, यही सोच "नीरज"है डरता,
होगी कृपा कब मुझ गरीब पर, अब सारी उम्र ढ़ली जाती है।।
बड़ी कृपा कीन्ही........
