करो सैयां बरजोरी
करो सैयां बरजोरी
सजना तुम नहीं आए बड़ी मायूस रही होरी,
तिरे बिन ओ पाहुना लगी बेज़ार सी ये होरी।
हमने राह तक ली सुबह से शाम तक तिहारी ,
मगर जब तुम नहीं आए करने हमसे बरजोरी।
फूल खिले थे बासंती लाल 'औ पीले गुलाबी ,
तिरे बिन सब बेरंग से लागे मेरे बलमा अनाड़ी ।
तुम्हारे संग खेलन को होरी मैं जो हुई बावरी ,
तुझ पर प्रेम लुटाऊं मैं जाऊँ बलि बलिहारी ।

