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Ajit Kumar Raut

Abstract

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Ajit Kumar Raut

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कर्म ही जीवन

कर्म ही जीवन

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व्यर्थ है जीवन कर्म के विहीन

 मूल्य नहीं जीवन में,

दुर्लभ जीवन व्यर्थ ही उनकी

 इस भव संसार में।


मिला है जीवन कर्म फलों से ही

  राष्ट्र कार्य ही करना,

शक्तिशाली हमें राष्ट्र बनना है

 जन सेवा ही करना।


भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनाना है

  ज्ञान अर्जित करना,

आस्था है हमारी हिन्दू संस्कृति 

  सम्भाल कर रखना।


कृष्णा हैं हमारे राम हैं हमारे

 आराध्य हैं हमारे,

जगन्नाथ भक्ति हृदय में रहे

 हिन्दू धर्म है हमारे।


शिव भक्ति नित्य जीवन धारा हो

  जनसेवा हो कर्तव्य,

समभाव करो गृहस्थाश्रम में

  राष्ट्रवाद हो कर्तव्य।


डिजिटल हो अब कार्य क्षेत्रों में

 समय की पुकार है,

भ्रष्टाचार होंगे खत्म राष्ट्र में भी

  नये युग की मंत्र है।


सत्तभोगी नहीं हमें बनना है

  जनसेवा करनी है,

दुर्लभ जीवन दी हमें प्रभु ने

  प्रभु कार्य करनी है।


सत्त के लिए न हो स्वार्थ प्राण में

  जनहित में कार्य हो,

सुरक्षित राष्ट्र हमें बनना है

  निस्वार्थ कार्य ही हो।


कर्म है जीवन आत्मनिर्भर की

 आत्मविश्वास हो हमें,

सर्वे सुखिनः की राष्ट्र बनना है

 कार्य करना है हमें।


एहि तो जीवन मनुष्य जीवन

  सत्य जीवन हमारे,

पाखंड में हिंसा न करना कभी

  पवित्र राष्ट्र हमारे।


प्रभु भक्ति हो जीवन यात्राओं में

  गीता ज्ञान प्रतिदिन,

मातृभाषा शिक्षा हो पढ़ने रीति

  धर्म पथ प्रतिदिन।


सनातनी हैं हम सारे राष्ट्र में

 हिन्दू हिन्दुत्व हमारी,

कर्तव्य पथ धर्मपथ सारे

 जनकल्याण हमारी।



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