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Ajit Kumar Raut

Abstract

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Ajit Kumar Raut

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राम तु है प्यारे, न्यारे

राम तु है प्यारे, न्यारे

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दिव्य ज्योति पडे सूर्य के

         सूर्य वंशी हो राम,

शोभित सूर्य के तिलक

         मिट गये हैं गम !!

माथे पर सूर्य तिलक

         अनुपम है दृश्य,

धन्य हुआ सारे संसा

        दिये प्रभु आशीष !!

देश में सब शुभ होगें

         रामराज्य होगा,

आस्था राष्ट्र भक्ति प्रीति         

महामंत्र गूंजेगा !!

त्रेतायुग जैसे  घटना

          दृष्टिगोचर हुआ,

दीर्घ दिनों के सपने थे

     प्रभु, भक्तों को दिया !!




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