STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Tragedy

4  

J P Raghuwanshi

Tragedy

"कर्ज"

"कर्ज"

1 min
632


कर्ज ने मध्यम वर्गीय परिवारों को,

इस तरह उलझाया है।

जैसे जान-बूझकर शिकारी ने,

बिल्ली को पिंजरे में फंसाया है।


टेक्स भरें हम, अपना पेट काटकर,

लुटा देते धन, सियासी घोषणाओं पर।

ये कैसी व्यवस्था, कैसे व्यवस्थापक है,

लायक है बेहाल, काबिज नालायक है।


व्यवस्था परिवर्तन के लिए प्रयासरत हूं,

लेकिन चतुर ठगों से, बहुत अधिक आहत हूं।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy