कोरोना स्मृति
कोरोना स्मृति
बीते दिनों का दर्द क्या होता था,
कोई आज मेरे शहर से पूछे,
मायूसी क्या होती है,
कोई उदास सड़कों गलियों से पूछे,
तन्हाई के पल क्या होते है,
कोई काँच के पिंजरे में बंद जिंदगी से पूछो,
खामोशी क्या होती है,
कोई बच्चों की बगिया से पूछो,
अरे सन्नाटे की गहराई क्या होती,
कोई जाकर समंदर से पूछे,
बस एक ईश प्रार्थना है मेरी,
भले जीवन में कुछ ना मिले,
सदा वतन से गुजरती बहार रहे,
सदा गुलजार मेरा चमन रहे,
मेरी वसुंधरा सदा सुजलाम् - सुफलाम् रहे.....
