STORYMIRROR

Archna Goyal

Romance

3  

Archna Goyal

Romance

कमल दल

कमल दल

1 min
235

कल रात सपनों में जो तुम मिले

जैसे लाखों गुल तन मन में खिले

मुस्कुराते रहे रात भर तारे गगन पे

झुमती रही रात भर जुल्फे पवन से


करवटें बदलती रही बिस्तर पर मैं

नींदों में मुस्कुराती रही शरमाती रही

नींदो में ही गाती रही गुणगुणाती रही

अपनी प्रीत को झुले झुलाती रही


भोर हुई तब ताजगी सी महसुस हुई

जैसे कमल दल खिले हो बीती रात में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance