Supriya Devkar
Action Classics
हाथ में लेकर कलम
लिखने का इरादा बनाया
विषय चुनने के लिए
मन को ही मनाया
जज्बात उमड़ने लगे
कागज पे उतरने लगे
मन की भाषा को अब
शब्दों के पंख लगे
एहसास हुआ जब
लिखावट पुरी हुई
मन के विचारों की कागज पे
सजावट पूरी हुई।
जख्म
जगमगाती दिवाल...
सपना
अनचाहे स्पर्श
तेरी यादों की...
तुम्हारी यादे...
राज
नहीं भूल सकते...
खूद पर काम कर...
वक्त
जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है
तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए। तुम्हें ये सब बदलना है अपने जैसे लोगों के साथ मिलकर सबके लिए।
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
सन सत्तावन में देखी, आज़ादी की पहली लड़ाई। सन सत्तावन में देखी, आज़ादी की पहली लड़ाई।
खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां। खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां।
दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो? दाने दाने को मर रहा आपका परिवार है। ये कैसे कश लगाते हो?
अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं। अब ऑनलाइन भी लड़कियों के लिए नए नियम बना रहे हैं।
करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ करो प्रकाश, सूर्य अम्बर पर आओ, छटे दुःख के बादल, हर्ष को बरसाओ
ये मेरी आन बान और शान है। हर पुस्तक से, जीवन का कोई न कोई पाठ सीखा है मैंने। ये मेरी आन बान और शान है। हर पुस्तक से, जीवन का कोई न कोई पाठ सीखा है मैं...
जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ। जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ।
बचपन जवानी और प्रौढ़ावस्था तीनों बीत गए, पिता पति और बेटा क्रम से मिलते बिछड़ते रहे। बचपन जवानी और प्रौढ़ावस्था तीनों बीत गए, पिता पति और बेटा क्रम से मिलते बिछड़...
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम। पेड़ भले ही सारे काटे हो, पर फिर भी ऑक्सीजन पा जाएं हम।
तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है। तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है।
जीवन से इतनी हो गई थी पीड़ा नस-नस को डसता था तुम्हारी बेरुखी का कीड़ा। जीवन से इतनी हो गई थी पीड़ा नस-नस को डसता था तुम्हारी बेरुखी का कीड़ा।
सूरज नहीं है तो क्या हुआ जुगनुओं की रोशनी तो बार-बार आती है सूरज नहीं है तो क्या हुआ जुगनुओं की रोशनी तो बार-बार आती है
वक्त से डरकर रहना सीख लो ऐ मानव, ठोकर मारने से कभी, पर्वत नहीं हिलता।। वक्त से डरकर रहना सीख लो ऐ मानव, ठोकर मारने से कभी, पर्वत नहीं हिलता।।
उस पल का हर लम्हा है जादू ,जो बन जाता सुखद एहसास । उस पल का हर लम्हा है जादू ,जो बन जाता सुखद एहसास ।