STORYMIRROR

AKIB JAVED

Abstract

4  

AKIB JAVED

Abstract

कलम ने उजाले सुहाने लिखे

कलम ने उजाले सुहाने लिखे

1 min
307


ग़ज़ल में ग़मों के तराने लिखे

कई दर्द अपने पुराने लिखे।


मुझे प्यार में तूने धोखा दिया

तिरे बख्शे ग़म के फसाने लिखे।


जहां ज़िन्दगी ने अंधेरे दिए

क़लम ने उजाले सुहाने लिखे।


हमीं ने लिखी वक्त की बेरुख़ी

हमी ने बदलते ज़माने लिखे।


हक़ीक़त में हो ख़्वाब पूरे ये सब

ऐसे ख़्वाब हमने सयाने लिखे


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract