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J P Raghuwanshi

Thriller

4  

J P Raghuwanshi

Thriller

कलिकाल

कलिकाल

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भीषण कलिकाल आ गया,

अधर्म हो चला सहन से परे।

रावण, मेघनाथ हर ओर खड़े।


हर तरफ हो रहे है सीता हरण।

हो रहा चहुं ओर चरित्र का हरण,

नीति धर्म न्याय का हो रहा क्षरण।

कलिकाल का चहुंओर लग गया ग्रहण।


सुना है। राम ! तुम आओंगे,

क्या सीता को सुरक्षित पाओंगे।

इन आत्तायियों का तुम्ही नाश कर सकते हो,

धर्म की संस्थापना कर जग में

खुशियां भर सकते हो।।


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