किताबों में खो जाते हैं
किताबों में खो जाते हैं
हम कुछ इस कदर खुद के हो जाते हैं,,,
तन्हाईयों में अक्सर किताबों में खो जाते हैं॥॥
कितना कुछ छिपा होता है इन चंद पन्नों में,,
जिन्हें खोजने में हम अक्सर लीन हो जाते हैं॥॥
कभी कोई रहस्यमयी कहानी तो कभी हास्यास्पद कविता,,
हम अक्सर इन लम्हों में खुद को पिरो जाते हैं॥॥
कभी पढ़ते हैं कोई वेद तो कभी रामचरितमानस,,,
इन शास्त्रों से अक्सर मोहित हो जाते हैं॥॥
और हॉं हमें पसंद हैं ये इस लोक से परे की दुनिया,,
कहानियों में इसे ओढ़कर सो जाते हैं॥॥
और मन को शांत करने के लिए हम अक्सर किताबों में खो जाते हैं॥॥
