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Aditi Rai

Others

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Aditi Rai

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सुहानी शाम

सुहानी शाम

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ये खामोश सी प्रकृति,,,

ये मध्यम पवन ॥

ये बारिश की हल्की फूहार ,,

और ये विचलीत मन ॥


ये पक्षियों की चहचहाहट,,

ये भौरों के आने की आहट ॥

सुहाना सा ये मौसम,,,

और ये बादलों की मुस्कुराहट ॥


सब याद दिलाते हैं,,

गुजरे हुए उन पलों का ॥

गाँव में जो बिताए थे हमने,,,

उन हसीन बचपन के लम्हों का ॥


सब कितना बदल गया,,

वो सुकून कहीं खो गया॥

अब शहर में शाम सुहानी नहीं होती,,

अब प्रकृति का सुहानापन कहूं खो गया ॥



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