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Aditi Rai

Abstract Others

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Aditi Rai

Abstract Others

कितनी हसीन होती हैं ना

कितनी हसीन होती हैं ना

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ये गाँव की सुनहरी सुबह, ये खिलखिलाती दोपहर ,,,

ये खामोश सी शाम और ये चाँदनी रात ॥


ना कोई होड़ होती है ना कोई ईर्ष्या, ,

होती है तो बस सप्रेम सबसे मन की बात॥


हर तरफ खुशहाली ये सुबह भी बड़ी रंगीन होती हैं ना,,,

ये गाँव की शामें भी कितनी हसीन होती हैं ना॥


हर तरफ अपनापन हर तरह प्यार,,

कभी साथ देना एक दूसरे का 

कभी छोटी मोटी तकरार॥

कभी सहमती दे देना घर में ठहरने की,,,

तो कभी किसी छोटी सी चीज के लिए इंकार ॥

ये गाँव में चारदीवारी भी कितनी महीन होती है ना,,,

ये गाँव की शामें भी कितनी हसीन होती हैं ना॥॥



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