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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"किताब"

"किताब"

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जो लोग नित ही पढ़ते हैं,किताब

उनके पूरे होते हैं सकल ही ख्वाब

जो सिर्फ पास ही रखते है,किताब

वो नशा चाहते,बिन पिये ही शराब

पढ़कर ही आता है,ज्ञान नायाब

बिना पढ़े न बनता है,कोई नवाब

जैसे शूलों बीच खिलता है,गुलाब

वैसे ही किताब सिखाती है,आदाब

जैसे बिना बहे,पानी होता,खराब

वैसे ही बिना पढ़े हुए,कोई किताब

दुनिया मे सब दगा दे सकते,जनाब

पर पुस्तक कभी दगा न देती,साब

जैसे बिना नींद के नही आते,ख्वाब

वैसे बिना पुस्तक,न तैरे कोई नाव

अमावस में बनते,पूनम आफताब

जो पढ़ते रहते है,नित नई किताब

आओ पढ़े,पढ़ाये सबको किताब

दुनिया से होगा,अशिक्षा का नाश

जितना बढ़ेगा किताबो का संसार

उतना ही होगा मनुष्य,लाजवाब

किताबे पढ़ो,ये बनाएंगी कामयाब

किताबें पढ़िए,ये सही देगी जवाब

किताबो से मिलेगा,तुम्हे इंकलाब

जागिये,भीतर का हटाइये,दबाव

किताबे,ही सच्ची मित्र है,नायाब

किताबे न छोड़ेगी तुम्हारा साथ

जग छोड़िए इन्हें मित्र बनाएं,आप

जिंदगी आसान होगी,अपनेआप

पढ़ते,पढ़ाते रहिए,आप किताब

आप चाहे कितने हो,उम्रदराज

गर पढते,रहोगे उड़ते हुए बाज।



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