किसके हो तुम कौन तुम्हारा
किसके हो तुम कौन तुम्हारा
किसके हो तुम कौन तुम्हारा,
यहां तो मतलब का जग सारा।
निभा सको तो अपने हैं सब,
वर्ना यह जग है बंजारा।
निश्छल मन की अगुआई में,
सबल बनाओ तन की धारा।
किसके हो तुम कौन तुम्हारा,
यहां तो मतलब का जग सारा।
मनन चिंतन ही मित्र तुम्हारे,
स्वयं विकल के रहो सहारे।
भक्ति भाव है मन का तारा,
सत संगति है चमन तुम्हारा।
किसके हो तुम कौन तुम्हारा,
यहां तो मतलब का जग सारा।
ज्ञान सकल सम्पत्ति तुम्हारी,
मन मंदिर में राखों त्रिपुरारी।
धरती गगन मध्य सुख सारा,
जाने जो सोइ पहुंचे सत द्वारा।
किसके तुम हो कौन तुम्हारा,
यहां तो मतलब का जग सारा।
