किसानों का पसीना
किसानों का पसीना
किसानों का पसीना होता बड़ा कीमती है
इस पसीने से ही चलती हमारी जिंदगी है
इसकी बूंदों की होती अमृत में गिनती है
मेहनत का गीत है,भाग्य की ये विनती है
जहां गिरता वहां खत्म हो जाता है ऊसर,
ये एक विस्मयकारी गंगा नीर की निधी है
ये पसीना ही हम लोगों का उदर भरता है,
इसमें अन्न पैदा करने की अद्धभुत कंठी है
आलस्य रोता है,चिल्लाता है, मुझे छोड़ दूँ,
किसान तेरे पसीने से मेरा जी घबराता है
तेरे पसीने से मेरी तो सांसे ही उखड़ती है
इस पसीने से ही प्रकृति नवसृजन करती है
फिर भी यहां पर विधि की विडंबना देखो,
धरती के भगवान की यहां पर हालत देखो
पेट के लिये उनकी रूह यहां पर तड़पती है
हमारे देश के नेताओ को वोट की चिंता है
किसान के लिये कोई नही यहां पे जिंदा है
किसानों पर सब करते यहां गंदी राजनीति है
किसी की रूह किसान के लिये नही रोती है
सबको अपनी जेब भरने की फिक्र होती है
किसानों का पसीना होता बड़ा कीमती है
पर लोगों के लिये वो गंदे पानी की गिनती है।
