STORYMIRROR

Bhoop Singh Bharti

Tragedy

3  

Bhoop Singh Bharti

Tragedy

किसान का दर्द

किसान का दर्द

1 min
246

जाड़ा म्ह भी खेत म्ह, खड़ा रहै दिन रैन।

देख उभाणे पांव यो, रातूं बदलै लैन।

रातूं  बदलै लैन, चैन सभ खोया भाई।

रहती बारामास, पांव म्ह फ़टी बिवाई।

सभका भरता पेट, नसीब फेर बी माड़ा।

रहै पूर म्ह राख, रातभर मारै जाड़ा।


   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy