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Pooja Agrawal

Abstract Tragedy


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Pooja Agrawal

Abstract Tragedy


मनमानी

मनमानी

1 min 264 1 min 264

सूनी सी राहों पर ठहरी सी आंखें मेरी

जज़्बातों के शोले टूटती हुई आहें मेरी

जो मुझ में छूट गया वह तेरा है

और तुझ में है निशानी मेरी

कोई पढ़ना चाहे तो कैसे पढ़े

बिखरी हुई सी कहानी मेरी

सोचते हैं जहांँ को छोड़ दें हम

बेवफा मौत भी नहीं आनी मेरी

वक्त चाहता तो कुछ और साथ रहते हम

किस्मत ने भी कहा मानी मेरी

वादा है नहीं बिठाएगें दिल में किसी को

तेरे नाम कर दी जिंदगानी मेरी

फिजा आते ही गुलशन उजड़ गया मेरा

कुछ काम ना आई बागवानी मेरी

शहरयार ने बिछाई ऐसी शतरंज की बिसात

घुटने टेक गई रानी मेरी

उम्रभर इल्तजा की दुश्मनों से दोस्ती की

बड़ी महंगी पड़ी मनमानी मेरी।


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