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Ervivek kumar Maurya

Romance

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Ervivek kumar Maurya

Romance

किस कदर मैं खुद को संभालूंगा

किस कदर मैं खुद को संभालूंगा

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किस कदर मैं खुद को संभालूँगा

तुझसे होके जुदा जब जाऊँगा।


याद आती हैं रातें वो गुजरे दिन

आने वाले पलों को कैसे जी पाऊँगा।


सुकूँ मिलता था तेरी बाँहों में आकर

वैसा आगोश फिर न पाऊँगा।


लब तेरी तारीफ करते न थकते थे

अब वैसा दर्पण कहाँ से लाऊँगा।


जा रहे हो गर मेरे मुकद्दर से

तुझे रोकूँगा नहीं खुद ही रुक जाऊँगा।


आखिरी वक्त में निगाहें तूने जो फेरी

सच कह रहा हूँ मर ही जाऊँगा।


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